लगभग १०० वर्ष पुराना है। शहर के मध्य स्थित भगवान श्रीगणेश का यह एकमात्र मंदिर।
लगभग ५० वर्षों से किया जा रहा है, यहां श्रीगणेशअथर्वशीर्ष महायज्ञ का आयोजन
इस वर्ष कोविड 19 (कोरोना वायरस) गाइडलाइन का पालन करते हुए किया गया कार्यक्रम का आयोजन
महामारी की भयावहता को देखते हुए आयोजकों ने यज्ञ में सीमित श्रधालुओं को ही सम्मिलित किया।
सभी ने मिलकर प्रार्थना की, कि भगवान श्रीगणेश कोरोना महामारी से समस्त मानवजाति की रक्षा करें और शीघ्रातिशीघ्र इस भयानक महामारी का निरसन करें।
सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए चेहरे पर फेस मास्क व कवर पहन कर लिया यज्ञ में भाग
राजगढ़ : प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्रीमन्नारायण आध्यात्मिक सेवा मंडल द्वारा श्री खेड़ापति गणेश मंदिर पर किया गया श्री गणेश अथर्वशीर्ष महायज्ञ का आयोजन।
आयोजक मंडल के संस्थापक व संचालक आचार्य पं. दुष्यंत पंचौली ने महायज्ञ के विषय में बताया कि, श्रीगणेशअथर्वशीर्ष महायज्ञ का आयोजन विगत लगभग ५० वर्षों से अनवरत किया जा रहा है। इस आयोजन का प्रारंभ आदणीय पंडित स्व. श्री रामकृष्ण जी शर्मा द्वारा एक मंडल बनाकर किया था। तभी से महायज्ञ को प्रतिवर्ष भगवान श्री गणेश जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) पर आयोजित किया जाता है। जिसमे सैंकड़ों कि संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होकर धर्मलाभ प्राप्त करतें है।
परन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते इस कार्यक्रम का स्वरूप अति सूक्ष्म किया गया और इस बार केवल १२ श्रद्धालुओं को ही सम्मिलित किया गया। जिन्होंने पुर्णरूप से कोविड़ 19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए यज्ञकार्य में भाग लिया।
इसी संदर्भ में खेड़ापति गणेश मंदिर के पुजारी पं. आशीष दुबे ने बताया कि मंदिर नगर का एकमात्र प्राचीन गणेश मंदिर है। जो लगभग १०० वर्ष पुराना है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर प्रातः काल ही भगवान गणेश का विशिष्ट श्रृंगार किया गया और दोपहर ठीक 12:00 बजे महाआरती के साथ ही भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया गया। तत्पश्चात दोपहर १:३० से महायज्ञ प्रारंभ हुआ जो सायं ५:३० पर पूर्णाहुति व यज्ञार्ती के साथ ही पूर्ण हुआ। प्रारंभ से ही यज्ञ का आयोजन केवल एकदिवसीय ही किया जाता रहा है। प्रतिवर्ष इसी प्रकार गणेश मंदिर पर चतुर्थी के इस महायज्ञ से ही १० दिवसीय गणेशोत्सव का प्रारंभ हो जाता है, और अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी की संध्या महाआरती के साथ ही उत्सव का भी समापन माना जाता है।
श्रीगणेशअथर्वशीर्ष महायज्ञ के इस विशिष्ट आयोजन में श्रीमन्नारायण आध्यात्मिक सेवा मंडल के संरक्षक व वरिष्ठतम पदाधिकारी पं. श्री नंदकिशोर पंचौली, पं. श्री शिवशंकर शर्मा, पं. लोकनाथ उपाध्याय, पं. प्रदीप शर्मा, पं. राजाबाबू जोशी, पं. मानस शर्मा, पं. कृष्ण कुमार पंचौली, पं. कुशाग्र पंचौली, पं. राहुल जोशी, पं. आदित्य दुबे सहित प्रधान यजमान के रूप में श्री आर. एन. सोंधिया सपत्नीक सम्मिलित हुए।
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